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संचार उपग्रह ( निष्क्रिय उपग्रह , सक्रिय उपग्रह) उपग्रह संचार सिद्धांत

 संचार उपग्रह ( निष्क्रिय उपग्रह , सक्रिय उपग्रह) , उपग्रह संचार सिद्धांत


संचार उपग्रह (Communication Satellite)

"आजकल सिग्नलों को पृथ्वी पर एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक प्रेषित करने के लिए कृत्रिम उपग्रहों का उपयोग किया जाता है। जिन्हें संचार उपग्रह कहते हैं। " 


"संचार की इस विधि को जिसमें प्रेषित्र और अभिग्राही के बीच सिग्नल का संचार, उपग्रह के द्वारा होता है, उपग्रह-संचार कहते हैं।"


उपग्रह-संचार में मॉडुलित माइक्रो तरंगों को प्रेषित्र से सीधे उपग्रह की ओर भेजा जाता है। यह उपग्रह इन तरंगों को परावर्तित कर अभिग्राही की ओर प्रेषित कर देता है।

उपग्रह संचार के लिए प्रयुक्त उपग्रह दो प्रकार के होते हैं-

(i) निष्क्रिय (Passive) उपग्रह-

ये उपग्रह प्रेषित्र से आने वाले सिग्नलों को उसी रूप में परावर्तित कर अन्य क्षेत्रों की ओर भेजते हैं। ये धातु लेपित गुब्बारे या धातु के गोले होते हैं जो निष्क्रिय परावर्तक भाँति कार्य करते हैं।


(ii) सक्रिय (Active) उपग्रह -

सक्रिय उपग्रह में स्वयं की पावर सप्लाई, ऐन्टिना तंत्र, प्रेषित्र, अभिग्राही आदि युक्तियाँ लगी होती हैं, जिन्हें ट्रान्सपोन्डर (Transponder) कहते हैं। ये उपग्रह पृथ्वी की सतह से कई सौ किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। पृथ्वी से प्रेषित दृश्य अथवा श्रव्य सिग्नलों को ये उपग्रह अभिग्रहण तथा प्रोसेसिंग कर उसी आवृत्ति में या बदली हुईआ में पृथ्वी की ओर विभिन्न दिशाओं में प्रेषित कर देते हैं।


ये सिग्नल विभिन्न भू-केन्द्रों द्वारा ग्रहण कर लिये जाते हैं। चूंकि ये सिग्नल अत्यन्त दुर्बल (Weak) होते हैं, भू-केन्द्रों में इनका प्रवर्धन किया जाता है। ये प्रवर्धित सिग्नल इन केन्द्रों से पुनः प्रसारित किये जाते हैं, जो अभिग्राही द्वारा प्राप्त कर लिये जाते हैं।


उपग्रह संचार सिद्धांत

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